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चाणक्य की 11 ऐसी बातें जो मनुष्य को कभी नहीं भूलनी चाहिए|

चनायक नीति

चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। वे ‘कौटिल्य’ नाम से भी विख्यात हैं। उन्होने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। उनके द्वारा रचित अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का महान ग्रंन्थ है। अर्थशास्त्र मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है। मुद्राराक्षस के अनुसार इनका असली नाम ‘विष्णुगुप्त’ था। विष्णुपुराण, भागवत आदि पुराणों तथा कथासरित्सागर आदि संस्कृत ग्रंथों में तो चाणक्य का नाम आया ही है, बौद्ध ग्रंथो में भी इसकी कथा बराबर मिलती है।

“भाग्य के विपरीत होने पर अच्छा कर्म भी दु:खदायी हो जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य

मूर्ख लोग कार्यों के मध्य कठिनाई उत्पन्न होने पर दोष ही निकाला करते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य

“समय का ज्ञान ना रखने वाले राजा का कर्म समय के द्वारा ही नष्ट हो जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य

“जिन्हें भाग्य पर विश्वास नहीं होता, उनके कार्य पुरे नहीं होते।” ~ आचार्य चाणक्य

“जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य

“जो हमारे दिल में रहता है, वो दूर होके भी पास है। लेकिन जो हमारे दिल में नहीं रहता, वो पास होके भी दूर है।” ~ आचार्य चाणक्य

“जो गुजर गया उसकी चिंता नहीं करनी चाहिए, ना ही भविष्य के बारे में चिंतिंत होना चाहिए। समझदार लोग केवल वर्तमान में ही जीते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य

“आदमी अपने जन्म से नहीं अपने कर्मों से महान होता है।” ~ आचार्य चाणक्य

“सबसे बड़ा गुरु मंत्र, अपने राज किसी को भी मत बताओ। ये तुम्हे खत्म कर देगा।” ~ आचार्य चाणक्य

“एक समझदार आदमी को सारस की तरह होश से काम लेना चाहिए और जगह, वक्त और अपनी योग्यता को समझते हुए अपने कार्य को सिद्ध करना चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य

“पुस्तकें एक मुर्ख आदमी के लिए वैसे ही हैं, जैसे एक अंधे के लिए आइना।” ~ आचार्य चाणक्य

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